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Sunday, 7 February 2016

UPTET SARKARI NAUKRI News - - 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने को मांगी 50% मदद

UPTET SARKARI NAUKRI   News - 



7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने को मांगी 50% मदद

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मदद मांगने के अलावा कर भी क्या सकते हैं -
अगर उत्तर प्रदेश ये सब करे तो मदद मांगने की जरूरत ही न पड़े -
1.  सैफई आदि अन्य महोत्सव के नाम पर फिजूल खर्ची बंद करे , बड़े स्टार को महोत्सव में बुलाने पर पाबंदी लगाए ।
स्टार तो पहले से ही स्टार हैं , महोत्सव का खर्च अधिकारी नेता अपनी जेब से दें
आम जनता की टैक्स की गाढ़ी कमाई नचनियों और ठुमको में न लगाई जाए
उत्तर प्रदेश के ही गरीब कलाकारों को आगे बढ़ाये

2. अपराधीकरण पर लोक लगाए , विधायकों / नेताओँ /अफसरों की गुंडागर्दी को तत्काल प्रभाव से रोक लगाए ।  जिससे इंडस्ट्री में भरोसा कायम हो और
रोजगार को बढ़ावा मिले

3. उत्तर प्रदेश आत्म निर्भरता हासिल करने के लिए स्टार्टअप  इंडस्ट्री को टैक्स / स्टाम्प टैक्स /सेल टैक्स आदि में राहत दे और नए रोजगारों को बढ़ावा दे ।
ब्यूरोक्रेसी / भ्रस्टाचार को ख़त्म करे और किसी भी इंडस्ट्री / आम नागरिक को परेशान करने वाले अधिकारी /नेता /मंत्री को बक्शा न जाए , केवल स्वच्छ छवि
के नेताओं को प्रोत्साहन मिले
इस से इंडस्ट्री / नागरिकों में विश्वास कायम होगा और लोग मेहनत के बल पर आगे बढ़ने को प्रोत्साहित होंगे न की लूट खसोट पर

4. सरकारी कर्मचारियों को कम्प्यूटर / आई टी / इंटरनेट उपयोग करना जरूरी करें और सरकारी विभाग को अधिक से अधिक पारदर्शी बनाया जाए ।
इस से होगा ये की कम संख्या में सरकारी कर्मचारी उच्च क्षमता का प्रदर्शन कर सकेंगे और अनावश्यक खर्चो (स्टोरेज , कर्मचारी , बिजली , रख रखाव इत्यादि )
से निजात मिलेगी और और जनता की गाढ़ी टैक्स की कमाई का सही उपयोग होगा

5. सरकार प्रतिभाओं को तरजीह दे और प्रतिभावान नागरिकों को ही सरकारी नौकरी में रखे
उत्तर प्रदेश सरकारी क्षेत्र में सभी उम्र के नागरिक आ सकें , और उनका एक निश्चित टेन्योर हो ।  मसलन पी सी एस इत्यादि में कोई उम्र की बाध्यता न हो
और अच्छी प्रतिभाओं को उसमे किसी भी उम्र (रिटायर मेंट से काम ) पर लोगों को लिया जा सके , जैसा की प्राइवेट इंडस्ट्री में होता है ।
और ये प्रतिभाएं सरकारी क्षेत्र को अधिक से अधिक विकसित कर सकें , अगर परफॉर्मेंस सही नहीं तो हटाया जा सके

6. प्राकृतिक जल ऊर्जा /सोर ऊर्जा / वैकल्पिक ऊर्जा ( बायो / एथेनॉल ) / पवन ऊर्जा की इंडस्ट्री को बढ़ावा मिले और टैक्स छूट मिले

7. प्राइवेट इंडस्ट्रीस (खासकर स्टार्ट अप ) को प्रोत्साहन मिले , जो अधिक से अधिक रोजगार दें , विशेष कमजोर क्षेत्र के उद्योगों में विकास कर रही हों

8.  पर्यटन इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए टारगेट सिस्टम प्राइवेट इंडस्ट्री / रिसर्च के हाथ में दिया जाए , और पर्यटन क्षेत्रों से होने वाली कमाई का कम से कम
30 % उस क्षेत्र के विकास में खर्च किया जाए , जिससे शहर साफ़ सुथरा हो और आकर्षक बने , जिस से पर्यटन इंडस्ट्री को और बढ़ावा मिले



उत्तर प्रदेश दक्षिण के कई राज्यों से बेहतर है प्राकृतिक संसाधन , पर्यटन स्थल आदि तमाम बातों में , लेकिन उत्तर प्रदेश की गंदी राजनीती ( भ्रस्टाचार , जातीगत राजनीती  ) से विकास का माहोल अच्छा नहीं बन सका था और अब समय रहते अच्छी व्यवस्था जरूरी है तो
अपने आप ही प्रदेश लेने की बजाय देने की स्थिति में आ जाएगा
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए केंद्र सरकार के सामने 50 फीसदी राशि की मांग रख दी है। दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ शनिवार को हुई बजट पूर्र्व बैठक में राज्य सरकार की ओर से यह मांग रखी गई। बैठक में प्रदेश की नुमाइंदगी राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष नवीन चंद्र वाजपेयी ने की।
वाजपेयी ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से सातवें वेतन आयोग की संभावित वेतन व पेंशन पुनरीक्षण की सिफारिशों की ओर वित्त मंत्री जेटली का ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें भविष्य में लागू करनी होंगी। इससे राज्य के खर्च में भारी वृद्धि होगी। ऐसे में राज्य के विकास के लिए पूंजी और कम पड़ जाएगी। इसे देखते हुए केंद्र को वेतन आयोग की सिफारिशें लागू किए जाने के शुरुआती वर्षों में प्रदेश पर आने वाले खर्च के 50 प्रतिशत हिस्से की मदद करनी चाहिए।
राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक में यूपी ने वित्त मंत्री जेटली के सामने रखी मांगें
केंद्रीय वित्त मंत्री की बजट पूर्व बैठक में प्रदेश की ओर से उठाए गए अहम मामले
ऋण सीमा 3.5 % की जाए
14वें वित्त आयोग की सिफारिशों का हवाला देते हुए कहा गया कि राज्यों की ऋ ण सीमा, जीएसडीपी के 3 प्रतिशत की सीमा के अंतर्गत ही तय की गई है। इसमें कुछ शर्तों के साथ 0.50 प्रतिशत की शिथिलता दी गई, पर केंद्र कृषि, शिक्षा तथा चिकित्सा व स्वास्थ्य के साथ-साथ अन्य सामाजिक क्षेत्रों में अधिक निवेश पर बल दे रहा है। ऐसे में राज्य की ऋण सीमा की छूट बिना शर्त 3.50 प्रतिशत की जाए।
केंद्र करे नुकसान की भरपाई
यूपी की ओर से कहा गया कि केंद्रीय सहायता वाली योजनाओं को लेकर गठित उपसमिति की ड्राफ्ट रिपोर्ट पर प्रदेश सरकार ने शर्त के साथ सैद्धांतिक सहमति दी थी। केंद्र को प्रदेश में केंद्र सहायतित परियोजनाओं के केंद्रांश में जो नुकसान हो रहा है, उसकी किसी अन्य रूप में भरपाई की जानी चाहिए।

News Sabhar : अमर उजाला ब्यूरो

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Friday, 5 February 2016

भीख मांगकर इंजीनियर ने भेजे पैसे, केजरीवाल से कहा खरीद लो जूते

भीख मांगकर इंजीनियर ने भेजे पैसे, केजरीवाल से कहा खरीद लो जूते



केजरीवाल के चप्पलों से शर्मिंदा होकर विशाखापट्टनम के एक इंजीनियर सुमित अग्रवाल ने उन्हें 364 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट भेजा है। इसी के साथ ही उसने उन्हें एक खुला पत्र भेजते हुए केजरीवाल से विनम्र निवेदन किया है कि वो फॉर्मल जूतों के एक जोड़ी जरूर खरीद लें।




जब राष्ट्रपति भवन में फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद के लिए डिनर किया गया था जिसमें केजरीवाल भी पहुंचे थे। वहां भी केजरीवाल अपने फ्लोटर पहनकर पहुंच गए थे।

ऐसे इंजीनियरों का  दिमाग खराब है  , व्यक्ति के परिधान नहीं व्यक्ति के कार्य देखे जाने चाहिए
हालाँकि केजरीवाल अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे , देश की अधिकांश आबादी के पास जूते खरीदने को पैसे नहीं हैं , ये इंजीनियर साहब अनाथों के केम्प में मदद कर दें , तो भी कुछ लोगों का तो भला होगा ।


जानते हैं महात्मा गांधी जी ने इंग्लैंड की राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में सिर्फ धोती पहन कर भाग लिया था

द्वीतीय गोलमेज सम्मेलन में ही जब गांधी ने भाग लिया तो वो ऐसे ही धोती में चले गये और वहां गांधी के पहुंचते ही चर्चिल ने गांधी को "अर्धनंगा फकीर" कहा था, कुछ समय बाद ही गांधी ने मुस्लीमो को संविधान में दिये जाने वाले कोटे का विरोध किया ओर तब फ्रंक ने गांधी को "देशद्रोही" कहा। ओर इतना सुनते ही गांधी जी गुस्से में वहां से भाग आये और इन्होने ब्रिटिश सरकार की सहमति से अपनी मांग पूरी करवाने के बाद बंद आंदोलन फिर से शुरू कर दिया और ब्रिटिश सरकार ने इन पर राजद्रोह का आरोप लगा कर जेल में डाल दिया

Wednesday, 3 February 2016

पीलीभीत: रेप का विरोध करने पर दबंगों ने बच्चों के सामने महिला को जिंदा जलाया Infront of Chidren, A mother burnt alive after brutally raped by Dominating persons of Village in Pilibheet, India UP should control its crime rate

पीलीभीत: रेप का विरोध करने पर दबंगों ने बच्चों के सामने महिला को जिंदा जलाया

Infront of Chidren, A mother burnt alive after brutally raped by Dominating persons of Village in Pilibheet, India

UP should control its crime rate

A Very Sad News

बच्चों के सामने मां को जिंदा जलाया
पीलीभीत: रेप का विरोध करने पर दबंगों ने बच्चों के सामने महिला को जिंदा जलाया

पीलीभीत| उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां दबंगों ने रेप का विरोध करने पर एक दलित महिला को उसके बच्चों के सामने ही मिट्टी का तेल डालकर जिंदा जला दिया। गंभीर रूप से झुलसी महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसकी मौत हो गई।

मिली जानकारी के मुताबिक़, दबंगों ने महिला के साथ रेप की कोशिश की। रेप का विरोध करने पर उन्होंने गुस्से में महिला को जिंदा जला दिया। घटना को अंजाम देने के आरोपी वहां से फरार हो गए।





उधर, पीड़ित महिला के पति ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है और जल्द से जल्द उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। पुलिस ने कहा कि फिलहाल आरोपी फरार हैं। उनकी तलाश की जा रही है।


Tags# दबंग, # पीलीभीत, # पुलिस, # महिला, # रेप,



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Monday, 1 February 2016

भारत की पहली महिला रग्बी टीम Indian Female Rugby Team

भारत की पहली महिला रग्बी टीम 

Indian Female Rugby Team

भारत की पहली महिला रग्बी टीम भी बन चुकी  है और एशियन देशों की प्रतिस्पर्धा में भाग ले चुकी है , लेकिन विदेशी यूरोपीयन टीमों के सामने तो शायद  ही ये जीत पाये ।

भारत या किसी भी एशियन देश की महिला टीम तो यूरोपीयन देशो के हाई स्कूल टीम से भी शायद ही जीत पाएं 








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देखिये एक झलक विदेशी रग्बी महिला  टीम की :- >
















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भारत के रग्बी संगठन के उपाध्यक्ष आगा हुसैन ने कहा,' आज से 11 साल पहले 1998 में भारत की पहली पुरुष रग्बी टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में हिस्सा लिया था। और अब महिला टीम का बनना हमारे लिए काफी मायने रखता है


>उड़ीसा की 20 साल की कबड्डी खिलाड़ी संगीता मिंज मुस्कुराते हुए बताती हैं, 'एक महीना पहले ही उन्होंने रग्बी का पहला मैच खेला है। और इतनी जल्दी टीम में चुन लिए जाने से वो काफी खुश हैं

टीम की कप्तान अवनी सबादे महाराष्ट्र के पुणे से हैं, जहाँ बहुत से स्कूलों में रग्बी खेला जाता है। अवनी कहती हैं, 'मैं चार-पाँच सालों से रग्बी खेल रही हूँ, पर मेरी टीम में से कुछ ने सिर्फ एक- दो साल ही खेला है। पर हम अपना सर्वश्रेष्ठ देकर जीतने की पूरी कोशिश करेंगे

संगीता और जशोबानी प्रधान दो ही टीम में ऐसी खिलाड़ी हैं जो कि पुणे की नही हैं। संगीता कहती हैं कि उनका परिवार भुवनेश्वर से काफी दूर रहता है और रग्बी के बारे में कुछ भी नहीं जानता


कई खिलाड़ियों को रग्बी खेलने का अनुभव थोड़ा है पर उन्होंने बॉक्सिंग, कुश्ती और कबड्डी जैसे खेलों में राज्य स्तर पर अपने स्कूलों का प्रतिनिधित्व किया है और दूसरे खेलों से जरूरी क्षमता हासिल की है


वाहबिज भरूचा हैंडबॉल और कुस्ती की खिलाड़ी रही हैं। उनके मुताबिक रग्बी दौड़ते हुए कुस्ती खेलने जैसा है


भारत में लड़कियों के लिए रग्बी खेलना नया है, ये पूछने पर वाहबिज के पिता कहते हैं, 'केवल खेलों के जरिए ही कोई अनुशासन में रहना और दूसरों का ध्यान रखना सीख सकता है। हमारे पूरे परिवार को उस पर गर्व है। वो एक महेनती लड़की है


टीम के कोच उसाया फिजी से हैं। उनका कहना है कि टीम के प्रदर्शन का स्तर विभिन्न स्पर्धाओं में भाग लेने से बढ़ेगा

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आइये जानते हैं रग्बी खेल  के बारे में 
What is Rugby Game


यह खेल ताकत और दम ख़म का खेल है , यह अमरीका का राष्ट्रिय खेल है और यूरोपीय देशों में बहुत लोकप्रिय है

It is a highly popular game in England and in European Countries.
Many schools organize Rugby tournament and even in Girls School / High School Level it is popular.


















रग्बी फुटबॉल (आम तौर पर केवल “रग्बी ”) वर्तमान में दो खेल-रूपों में है- रग्बी लीग या रग्बी यूनियन ।
यह युनाइटेड किंगडम के विभिन्न इलाकों में विकसित फुटबॉल के एक समान्य रूप से निकले हुए अनेक खेल रूपों में से एक है।

विदेशों में यह खेल महिलाओं के बीच भी लोकप्रिय है और हाई स्कूल स्तर पर ही तमाम टूर्नामेंट चलते रहते हैं

फुटबॉल के उस खेल में जो रग्बी स्कूल में 1750 और 1859 के बीच खेला जाता था बॉल को हाथ से फेकने की अनुमति थी लेकिन किसी भी खिलाड़ी को यह छूट नहीं थी कि वह अपने विरोधी पक्ष के गोल की तरफ बॉल को हाथ में लेकर दौड़े. प्रत्येक पक्ष में कितने खिलाड़ी खेलेंगे यह तय नहीं होता था और कभी-कभी तो एक प्रकार के विशाल रॉलिंग मॉल में सैकड़ों भाग लेते थे। अक्सर इस खेल में खिलाड़ियों को गम्भीर चोटें आती थीं। बॉल के साथ दौड़ने की शुरुआत 1859 और 1865 के बीच किसी समय हुई थी। विलियम बेव एलिस को इस बात का श्रेय जाता है कि 1823 में बॉल के साथ सामने की ओर दौड़कर उन्होंने स्थानीय नियमों को तोड़ा. इसके कुछ दिन बाद इस खेल के लिए लिखित नियम बनाए गए जो पहले स्थानीय आपसी समझौतों के आधार पर खेला जाता था। रग्बी स्कूल के लड़कों ने 1870 में अपने खेल के लिए पहला लिखित नियम बनाया.



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Saturday, 30 January 2016

मोदी सरकार का एक बेहतरीन कदम - 55 वर्ष से अधिक उम्र के अफसरों का कामकाज परखेगी सरकार दूसरा अगर मोदी जी भ्रस्टाचार /पक्षपात पर जीरो टॉलरेंस अपनाते हैं, तो यह सोने पे सुहागा होगा

मोदी सरकार का एक बेहतरीन कदम - 55 वर्ष से अधिक उम्र के अफसरों का कामकाज परखेगी सरकार 
दूसरा अगर मोदी जी भ्रस्टाचार /पक्षपात  पर जीरो टॉलरेंस अपनाते हैं, तो यह सोने पे सुहागा होगा 






यह देश युवाओं का देश है खुद मोदी जी कहा करते हैं , आजका युवा कम्यूटर तकनीकी ज्ञान में कहीं आगे है और अधिकांश युवा बेरोजगार है ।
इस युवा शक्ति का समुचित लाभ उठाया जाना चाहिए ।

बिल गेट्स , नारायण मूर्ती , मार्क जुकरबर्ग, अलबर्ट आइंस्टीन  इत्यादि तमाम व्यक्तियों ने युवा काल में ही उच्च प्रदर्शन करते हुए महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किये ।
बिल गेट्स , नारायण मूर्ती इत्यादि ने स्वेच्छा से ही अपने स्वयं के बनाये उद्योग से सेवा निवृति ले ली थी । 
लेकिन हालात ये हैं की हमारे देश के नौकरशाह जो सबसे ऊंची तनख्वाह ले रहे हैं उम्र दराज होने के बाद भी अच्छा काम काज नहीं कर रहे हों तो नए लोगो को मौका दिया जाना चाहिए

साथ ही देश की युवा शक्ति का भी भरपूर उपयोग लेने के लिए इनको अधिक से अधिक सरकारी कामकाज में लिया जाना चाहिए 

Friday, 29 January 2016

550 डाकुओं का सरदार पंचम सिंह बन गया ‘संत’, कभी किए थे 125 कत्ल

550 डाकुओं का सरदार पंचम सिंह बन गया ‘संत’, कभी किए थे 125 कत्ल

मप्र. खूंखार डाकू, चंबल के बीहड़ों का राजा, 550 डाकुओं का सरदार और लगभग 125 कत्लों के आरोप में भारत सरकार द्वारा दो करोड़ रुपए का इनामी डाकू पंचम सिंह आज का राजयोगी बन चुका है। अब लोगों के मन को परिवर्तित करने में अपना जीवन व्यतीत कर रहा है।



कभी चंबल के बीहड़ों में बंदूक की नोक पर दहशत का पर्याय रहा डाकू सरदार पंचम सिंह राजयोगी बनने के बाद देशभर में अध्यात्म की अलख जगा रहा है। पंचम ने अध्यात्म और आत्मविश्वास के बल पर जिंदगी बदलने के गुर सिखाए।

550 डाकुओं ने किया था समर्पण
चंबल के बीहड़ों में दहशत के रूप में कुख्यात पंचमसिंह जमीनदारों के सताने पर परिवार का बदला लेने के लिए डाकू बने। पंचायत चुनाव के दौरान एक पक्ष का समर्थन करने पर विरोधी गुट के लोगों ने इतना बेरहमी से पीटा कि लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इलाज के बाद जब गांव लौटा तो ग्रामीणों पर उत्पीडऩ शुरू हो चुका था। विरोधी गुट हावी था। हर किसी का जीना दुश्वार था। फिर क्या था कूद पड़े चंबल के बीहड़ों में 12 डाकुओं के साथ।

धीरे-धीरे यह कुनबा बढ़कर 550 पहुंच गया। बदले की भावना से छह लोगों की सरेआम हत्या कर दी गई। करीब 14 साल तक बीहड़ों में दहशत का पर्याय बना रहा। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रेरणा से आत्म समर्पण किया। तब 550 डाकुओं ने एक साथ बंदूक छोड़ दी थी।

फिर अध्यात्म से बदलीं राहें…
समर्पण करने के बाद जब पंचम जेल में सजा काट रहे थे, तब प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की मुख्य संचालिका दादी प्रकाश जेल आईं थीं। उन्हें इंदिरा गांधी ने चुनौती दी थी कि डाकुओं का मन बदल कर दिखाएं। दादीजी ने प्रेरित किया तो मन बदल गया। पंचम सिंह 90 साल के हैं और आज भी वे राजयोगी बनकर जी रहे हैं। देखें पंचम सिंह की PHOTO, इसमें बांयी जब डाकू थे तब की तस्वीर और दांयी अब राजयोगी की।



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Thursday, 28 January 2016

20 #SmartCities का एलान: UP-बिहार-बंगाल से एक भी शहर नहीं, MP से तीन

20 #SmartCities का एलान: UP-बिहार-बंगाल से एक भी शहर नहीं, MP से तीन



नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने गुरुवार को पहली 20 स्मार्ट सिटीज का एलान कर दिया। केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू के मुताबिक, कॉम्पिटीशन के आधार पर इनका सिलेक्शन हुआ है। इस लिस्ट में यूपी, बिहार और प. बंगाल जैसे राज्यों से एक भी शहर नहीं है। जबकि एमपी से तीन शहर हैं। मोदी सरकार ने इन 20 सीटीज के लिए पिछले साल अगस्त में 97 शहरों को शॉर्ट लिस्ट किया था।





कैसे होगी प्रोजेक्ट फंडिंग और क्यों है स्मार्ट सिटीज पर फोकस...

- फर्स्ट फेज में 20 और अगले हर दो साल में 40-40 शहरों को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए सिलेक्ट किया जाएगा।
- मंत्री के मुताबिक, सिलेक्ट शहरों को पहले साल 200- 200 करोड रुपए और बाद में तीन साल तक 100-100 करोड़ दिए जाएंगे।
- अरबन डेवलपमेंट मिनिस्ट्री के कॉन्सेप्ट नोट के मुताबिक, देश में अभी शहरी आबादी 31 फीसदी है, लेकिन इसकी भारत के जीडीपी में हिस्सेदारी 60 पर्सेंट से ज्यादा है।
- एक अनुमान है कि अगले 15 साल में शहरी आबादी की जीडीपी में हिस्सेदारी 75 पर्सेंट होगी।
- इस वजह से 100 स्मार्ट सिटीज बनाने का टारगेट रखा गया है।
- इस प्रोजेक्ट के लिए 48000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। प्रोजेक्ट में केंद्र और स्टेट गवर्नमेंट की हिस्सेदारी रहेगी।
यूपी-बिहार-बंगाल खाली हाथ क्यों? और सरकार का क्या है तर्क...

- यूपी में इस साल इलेक्शन नहीं है। 2017 में इलेक्शन से पहले अगले साल सरकार को 40 और सिटीज का एलान करना है।
- जानकारों का कहना है कि बिहार में पिछले साल बीजेपी चुनाव हार चुकी है।
- पश्चिम बंगाल में इस साल इलेक्शन होना है लेकिन इसके बाद भी वहां से इस लिस्ट में कोई शहर नहीं है। पिछले साल जब 97 शहरों को शॉर्ट लिस्ट किया गया था तो उसमें बंगाल से 4 शहर थे।
- सरकार का कहना है कि सिलेक्शन 97 शहरों में कॉम्पिटीशन के आधार पर हुआ है।
- 1.52 करोड़ लोगों ने स्मॉर्ट सिटीज के सिलेक्शन प्रॉसेस में हिस्सा लिया।
ये 20 सिटीज, जिन्हें फर्स्ट फेज में बनाया जाएगा स्मार्ट....
1. भुवनेश्वर 2. पुणे 3. जयपुर 4. सूरत 5. कोच्चि 6. अहमदाबाद 7. जबलपुर 8. विशाखापट्टनम 9. सोलापुर 10. दावणगेरे 11. काकीनाड़ा 12. नई दिल्ली, 13 इंदौर, 14. कोयम्बटूर,15. बेलगाम, 16. उदयपुर, 17. गुवाहाटी, 18. लुधियाना 19. चेन्नई 20. भोपाल
क्या हैं स्मार्ट सिटी के बेसिक प्रिंसिपल?
सरकार ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को तीन बुनियादी प्लान पर तैयार किया है।
1. क्वालिटी ऑफ लाइफ
- स्मार्ट सिटी में रहने वाले हर शख्स को क्वालिटी लाइफ मिले। यानी किफायती घर हो, हर तरह का इन्फ्रास्ट्रक्चर हो।
- पानी और बिजली चौबीसों घंटे मिले। एजुकेशन के ऑप्शंस हों। सिक्युरिटी हो।
- एंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स के सोर्स हों।
- आसपास के इलाकों से अच्छी और तेज कनेक्टिविटी हो। अच्छे स्कूल और हॉस्पिटल भी मौजूद हों।
2. इन्वेस्टमेंट
- स्मार्ट सिटी में वहां मौजूद ह्यूमन रिसोर्स और नेचुरल रिसोर्स के मुताबिक, पूरा इन्वेस्टमेंट भी आए।
- बड़ी कंपनियों को वहां अपनी इंडस्ट्री लगाने के लिए सुविधाएं और सहूलियत मिले। उन पर टैक्स का ज्यादा बोझ न हो।
3. रोजगार
- स्मार्ट सिटी में इन्वेस्टमेंट ऐसा आए जिससे वहां या आसपास रहने वाले लोगों को रोजगार के पूरे मौके मिलें।
- स्मार्ट सिटी के अंदर रहने वालों को अपनी आमदनी के लिए उस इलाके से ज्यादा दूर नहीं जाना पड़े।
जो सुविधाएं आजादी के बाद से अब तक आपको नहीं मिलीं, वे स्मार्ट सिटी में दिलाने के दावे
स्मार्ट सिटी में ट्रांसपोर्ट, रेजिडेंशियल, बिजली-पानी, हेल्थ और एजुकेशन की सुविधाएं देने के लिए कुछ मानक तय किए गए हैं।
1. ट्रांसपोर्ट
- स्मार्ट सिटी के अंदर एक स्थान से दूसरे स्थान जाने का ट्रैवल टाइम 45 मिनट से ज्यादा न हो।
- कम से कम 2 मीटर चौड़े फुटपाथ हों।
- रिहाइशी इलाकों से 800 मीटर की दूरी या 10 मिनट वॉक पर बस या मेट्रो की सुविधा हो।
2. रिहाइश
- 95 फीसदी रिहाइशी इलाके ऐसे हों जहां 400 मीटर से भी कम दूरी पर स्कूल, पार्क और रीक्रिएशन पार्क मौजूद हों।
- 20 फीसदी मकान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए हों।
- कम से कम 30 फीसदी रिहाइशी और कमर्शियल इलाके बस या मेट्रो स्टेशन से 800 मीटर की दूरी के दायरे में ही हों।
3. बिजली और पानी
- स्मार्ट सिटी में 24*7 पानी और बिजली सप्लाई हो।
- 100 फीसदी घरों में बिजली कनेक्शन हों। सारे कनेक्शनों में मीटर लगा हो।
- लागत में नुकसान न हो। यानी कोई बिजली-पानी चोरी न कर पाए।
- प्रति व्यक्ति कम से कम 135 लीटर पानी दिया जाए।
4. वाईफाई कनेक्टिविटी
- 100 फीसदी घरों तक वाईफाई कनेक्टिविटी हो।
- 100 एमबीपीसी की स्पीड पर वाईफाई पर मिले।
5. हेल्थ
- स्मार्ट सिटी में इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम 30 मिनट से ज्यादा न हो।
- हर 15 हजार लोगों पर एक डिस्पेंसरी हो।
- एक लाख की आबादी पर 30 बिस्तरों वाला छोटा अस्पताल, 80 बिस्तरों वाला मीडियम अस्पताल और 200 बिस्तरों वाला बड़ा अस्पताल हो।
- हर 50 हजार लोगों पर एक डायग्नोस्टिक सेंटर हो।
5. एजुकेशन
- 15 फीसदी इलाका एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स के लिए हो।
- हर 2500 लाेगों पर एक प्री-प्राइमरी, हर 5000 लोगों पर एक प्राइमरी, हर 7500 लोगों पर एक सीनियर सेकंडरी और हर एक लाख की आबादी पर पहली से 12वीं क्लास तक का एक इंटिग्रेटेड स्कूल हो।
- सवा लाख की आबादी पर एक कॉलेज हो।
- 10 लाख की आबादी पर एक यूनिवर्सिटी, एक इंजीनियरिंग कॉलेज, एक मेडिकल कॉलेज, एक प्रोफेशनल कॉलेज और एक पैरामेडिकल कॉलेज हाे।

News Sabhaar : bhaskar.com (28.01.2016)

Wednesday, 27 January 2016

UPTET SARKARI NAUKRI UP Teacher News Today - ◆◆◆◆बृहस्पतिवार-28-01-2016◆◆◆◆

UPTET SARKARI NAUKRI   UP Teacher News Today 



◆◆◆◆बृहस्पतिवार-28-01-2016◆◆◆◆
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क्या दुआ करु मेरे अपनो के लिए ऐ_खुदा ..
बस यही दुआ है कि , मेरे अपने कभी किसी_दुआ के मोहताज न हो ..
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NEWS WORLD✒: -1
पैंतालीस मुन्ना भाई और मिले, वेतन रोका, नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
हरदोई। बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाण पत्र पर नियुक्ति पाने वाले मुन्ना भाइयों के मिलने का सिलसिला जारी है। वर्ष 2014 में फर्जी टीईटी प्रमाण पत्र पाए जाने पर 45 टीचरों को वेतन रोक नोटिस जारी किया गया है। साथ ही कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो गई है। बताते चले कि इससे पहले 38 मुन्ना भाई मिल चुके हैं। जिसमें 32 पर एफआईआर दर्ज है। उधर, इसस मामले से विभाग में हड़कंप है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. बृजेश मिश्र में 6 अगस्त 2014 को नियुक्त किए गए बीटीसी/ विशिष्ट बीटीसी एवं उर्दू बीटीसी के अंतर्गत जिले में विभिन्न विद्यालयों में तैनात 45 टीचरों का वेतन टीईटी 2011 का प्रमाण पत्र संदिग्ध मिलने पर वेतन रोक कर नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है। इनमें बेंहदर ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय तुरनारूद्ध के टीचर हरवीर सिंह, सर्वे के सुनील सिंह, मडिलहा के मनोज कुमार मढ़िया के सौरभ सचान, मौलवी खेड़ा योगेंद्र सिंह, महमूदपुर लाल्ता के उमेश चंद्र यादव, बिलग्राम ब्लाक के सखेड़ा की कुमारी नीरज यादव, टड़ियावां के कोड़रा के राजेंद्र सिंह, भरावन के महसुआ के दिनेश कुमार, मंडौली के राम गोपाल सिंह, महुआ डांडा गीतम सिंह, कुकरा के रघुराज सिंह, हरपालपुर ब्लाक के लुलामऊ द्वितीय के टीचर मोहन सिंह बारी के सुरेंद्र सिंह, टिकार के विवेक कुमार यादव, मस्तापुर के मनोज कुमार, बरान के प्रेम चंद्र, महसूलापुर के मनोज कुमार, मिश्रनपुरवा के प्रमोद कुमार, किरतियापुर के माघवेंद्र सिंह, अहिरोरी ब्लाक के खद्दीपुर के दिनेश चंद्र, कुचौरा के हरेन्द्र पाल सिंह, टोडरपुर ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय कुसुमा के परवीन कुमार, मझिला के राजीव कुमार, मझौची के अरविंद कुमार, माधौपुर के राघवेंद्र सिंह, कुचीखेड़ा के हरीसिंह बछौर, संडीला ब्लाक के खुटेहना के बने सिंह, मदारपुर के जसवीर सिंह, सांडी ब्लाक के कुलिया के विनय कुमार, बहेलियनपुर के शिव कुमार, कुशलपुरवा के हरवीर सिंह, रजानी खेड़ा की शशि यादव, महितापुर के प्रेम सिंह, सेमरिया के धर्मवीर सिंह, भरखनी ब्लाक के मुंडेर की सुशीला कुमारी, कुंवरपुर के यतेंद्र, रामपुर लाल की पारुल बघेल,मल्लावां ब्लाक के मीर नगर की सपना,हरियावां के शाहपुर बिनौरा की ललिता यादव, शहजाद नगर की ममता सिंह, पिहानी ब्लाक के पिपरी की बीना वर्मा, कौड़ा के शिवकुमार, कोथावां ब्लाक के मालपुर के अरविंद कुमार और मनिकपुर के महेंद्र पाल शामिल है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. ब्रजेश मिश्र ने बताया कि सभी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। एक सप्ताह तक सही जवाब न देने पर सेवा समाप्त कर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इससे विभाग में हड़कंप मच गया।
तीन सदस्यीय टीम करेगी जांच
हरदोई। जिले में वर्ष 2015 में टीईटी के आधार पर मिले 38 मुन्ना भाइयों के मामले में जांच के लिए शिक्षा निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद लखनऊ सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने बीएसए की आख्या के आधार पर तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है। जिसमें संयुक्त शिक्षा निदेशक लखनऊ मंडल सुत्ता सिंह, उप शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा निदेशालय लखनऊ गणेश कुमार और विधि अधिकारी परिषद मुख्यालय लखनऊ प्रदीप कुमार वर्मा शामिल है। शिक्षा निदेशक ने पांच फरवरी तक जांच की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए है। इससे विभाग में हड़कंप मचा है।
टीईटी प्रमाणपत्रों का नहीं हो सका मिलान,
वर्ष 2014 में 315 टीचरों की नियुक्ति
वर्ष 2015 की नियुक्ति में मिले है 38 मुन्ना भाई,32 पर दर्ज हो चुकी है रिपोर्ट


NEWS WORLD✒: -2
रसोइया ने हेडमास्टर को बंधक बनाकर पीटा
मानदेय नहीं मिलने से परेशान थी
अमर उजाला ब्यूरो
पुरंदरपुर। सोहरवलिया कला के टोला दर्जीचक पंडितपुर के प्राथमिक विद्यालय के हेडमास्टर को वहां की रसोईया ने बंधक बना लिया और पिटाई की। मानदेय न मिलने से रसोईया परेशान थी। सौ नंबर सूचना के बाद पुलिस के पहुंचने पर मुक्त हेड मास्टर मुक्त हुए।
फरेन्दा क्षेत्र के सोहरविया कला टोला पंडिपतपुर दर्जीचक के प्राथमिक विद्यालय पर मंगलवार को साढ़े दस बजे झंडारोहण के बाद रसोईया ऊषा देवी ने मानदेय को लेकर राजकुमार मौर्या को बंधक बना लिया और पिटाई कर दी। हेड मास्टर ने सौ नंबर डायल किया तो पुरन्दरपुर पुलिस ने पहुंच कर उनको छुड़ाया और थाने पर लाई। ऊषा देवी को पिछले वित्तीय वर्ष में मात्र छह हजार रुपया मिला था। रसोईया का आरोप है कि तीन महीने से हेड मास्टर स्कूल पर नहीं आ रहे थे। घटना को लेकर अफरातफरी मच गई।
इस संबंध में हेड मास्टर राजकुमार मौर्या ने कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया। एसओ चंद्रेश यादव का कहना है कि हेडमास्टर को बंधक बनाने की खबर पुलिस कंट्रोल रुम से मिली। सूचना के पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें मुक्त कराया। तहरीर मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
कंट्रोल रूम की सूचना पर विद्यालय पहुंची पुलिस ने छुड़ाया
[4:33am, 1/28/2016] ✒अनुज सैनी🇮🇳NEWS WORLD✒: -3
छह वर्षों से ठप पड़ी है शिक्षक चयन प्रक्रिया
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए गठित उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड एवं अशासकीय डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती के लिए गठित उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में बीते छह वर्ष से अधिक समय से चयन प्रक्रिया ठप है। सरकार की ओर से मनमाने तरीके से इन भर्ती आयोगों में अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति किए जाने को कोर्ट में चुनौती दिए जाने और हाईकोर्ट से अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति को अवैध घोषित कर दिए जाने के बाद माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ गई है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में 2009, 2010 के बाद टीजीटी-पीजीटी के किसी नए पद पर भर्ती नहीं हो सकी है। 2011 में घोषित टीजीटी-पीजीटी के पदों की घोषणा के बाद कोर्ट की ओर से रोक के कारण इन पदों पर भर्ती नहीं हो सकी है। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद रोक हटी तो चयन बोर्ड में इस समय अध्यक्ष-सदस्य के न होने से काम ठप पड़ा है। 2013 में घोषित टीजीटी-पीजीटी के पदों के लिए जनवरी 2015 में परीक्षा तो कराई गई परंतु कानूनी अड़चन के कारण अभी तक परीक्षा परिणाम घोषित नहीं किया जा सका।
भर्ती आयोगों में अध्यक्ष सदस्यों के काम पर रोक एवं हटाए जाने के बाद काम ठप
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड एवं उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में भर्ती प्रक्रिया पर लगा विराम


NEWS WORLD✒: -4
नियुक्ति के लिए सचिव का घेराव
इलाहाबाद (ब्यूरो)। प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 72825 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले 1100 अभ्यर्थियों ने बुधवार को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद का घेराव किया। अभ्यर्थियों का कहना था कि 27 जनवरी तक अभ्यर्थियों की सूची ऑनलाइन नहीं की गई है। इन अभ्यर्थियों ने 28 जनवरी से सचिव बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पर धरना देने का निर्णय लिया है। घेराव करने वालों में संजीव मिश्र, विनोद वर्मा, नवीन, सुशील सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।


NEWS WORLD✒: -5
आगरा के बीआर अंबेडकर विवि में एसआईटी की कार्रवाई
फर्जी मार्क्सशीट मामले में बाबू लखनऊ से गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
आगरा/लखनऊ। डॉ. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी के चर्चित फर्जी मार्क्सशीट प्रकरण में आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू हो गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने यूनिवर्सिटी के खंदारी कैंपस में तैनात क्लर्क रणवीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। उसे लखनऊ में कोर्ट में पेश किया गया। वहां से जेल भेज दिया गया।
रणवीर सिंह मूलरूप से फीरोजाबाद के रहने वाले हैं। मुकदमा अपराध संख्या तीन /2014 में उन्हें आरोपी पाया गया था। रणवीर सिंह 2005 से 2015 तक बीएड सेक्शन में तैनात रहे हैं। इस दौरान जाली मार्क्सशीट बेची गईं। इनका रिकार्ड गोपनीय चार्ट में दर्ज किया गया।
यह केस धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में दर्ज किया गया था। इसकी विवेचना पहले आगरा पुलिस ने की, लेकिन बाद में केस एसआईटी को ट्रांसफर कर दिया गया। मामले के विवेचक निरीक्षक पुतान सिंह ने पूछताछ व बयान दर्ज करने के लिए रणवीर को एसआईटी मुख्यालय लखनऊ बुलाया था। वहीं से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
अब निशाने पर 20 कर्मचारी और 10 अधिकारी
एक लिपिक की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी की तैयारी 20 कर्मचारी और 10 अधिकारियों पर कार्रवाई करने की है। इनके खिलाफ केस पहले से दर्ज हैं। आगरा पुलिस ने इन्हें क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन एसआईटी ने इनके खिलाफ साक्ष्य जुटा लिए। पहले इन मामलों की सुनवाई आगरा कोर्ट में हो रही थी, लेकिन अब सभी केस लखनऊ ट्रांसफर किए जा चुके हैं। इसके बाद ही एसआईटी एक्शन में आई है।
2005 से 2009 तक बीएड की फर्जी मार्कशीट बेचे जाने की जांच पहले आगरा पुलिस को दी गई थी। तब पुलिस ने छह केस दर्ज किए थे। इनमें यूनिवर्सिटी के 10 अधिकारी और 20 कर्मचारी आरोपी बनाए गए थे। इनमें विश्वविद्यालय के तत्कालीन उपाध्यक्ष अवतार सिंह कुकला और रजिस्ट्रार शिवपूजन सिंह व कई अन्य नामजद हुए थे। मामले के मुख्य आरोपी तत्कालीन उपाध्यक्ष की कुछ अरसा पहले मृत्यु हो चुकी है जबकि तत्कालीन रजिस्ट्रार पिछले करीब डेढ़ वर्ष से फरार चल रहे हैं।


NEWS WORLD✒: -6
बीपीएड डिग्री धारकों ने सरकार को वादा याद दिलाया
लखनऊ। प्रशिक्षित बीपीएड संघर्ष मोर्चा के बैनर तले प्रदेश भर से जुटे बीपीएड डिग्री धारकों ने बुधवार को स्थायी नियुक्ति के लिए किए गए सरकार केवादे की याद दिलाई।
अनिश्चतकालीन धरने पर अड़े बीपीएड डिग्री धारकों को एसीएम प्रथम की ओर से मुख्यमंत्री से एक सप्ताह के अंदर वार्ता कराने का आश्वासन देने केबाद धरना स्थगित कर दिया गया।46 हजार उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षकों के पद पर स्थायी नियुक्ति देने और एक सितंबर 2015 को हुए आंदोलन में 101 नामजद लोगों पर से मुकदमा वापस लेने को लेकर बीपीएड डिग्री धारक लक्ष्मण मेला मैदान में जुटे थे।


NEWS WORLD✒: -7
बिना परीक्षा कांस्टेबलों की भर्ती पर उठे सवाल
इलाहाबाद (ब्यूरो)। सूबे में बिना परीक्षा कराए पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती कराने की सरकार की नई नीति को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका दाखिल कर सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में किए गए संशोधन को चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रदेश सरकार को इस मामले में चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। पूछा है कि पहले से चली आ रही भर्ती प्रक्रिया में संशोधन कर नया नियम बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। मामले की गंभीरता के मद्देनजर कोर्ट ने महाधिवक्ता को भी नोटिस जारी कर सरकार का पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
रणविजय सिंह और कई अन्य याचिका दाखिल कर कहा है कि पुलिस विभाग में सिपाही का पद बेहद महत्वपूर्ण है। इस पद पर भर्ती के लिए अभ्यर्थी की योग्यता का विधिवत परीक्षण कर चयन करना आवश्यक है। पूर्व में भर्ती के लिए लिखित परीक्षा, रीजनिंग टेस्ट, मानसिक योग्यता और शारीरिक दक्षता, साक्षात्कार आदि कई चरणों में परीक्षा लेकर चयन का नियम है। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में इस नियम को संशोधित करते हुए नया नियम बना दिया है। अब सिपाहियों की भर्ती मात्र उनके हाईस्कूल और इंटरमीडिएट प्राप्तांक के आधार पर तैयार मेरिट से होगी। शारीरिक दक्षता के नाम पर साढ़े चार किलोमीटर दौड़ भी होगी। इससे व्यापक पैमाने पर धांधली की आशंका है तथा योग्य अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो सकेगा। याचिका में संशोधित नियमावली को रद्द करने की मांग की गई है। इस मामले में चार सप्ताह के बाद सुनवाई होगी।


NEWS WORLD✒: -8
सीटीईटी 21 को एडमिट कार्ड जारी
राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा यानी सीबीएसई बोर्ड ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीटीईटी) के लिए ऑनलाइन एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। परीक्षार्थी इन्हें डाउन लोड कर सकते हैं। इस परीक्षा का आयोजन 21 फरवरी को किया जाएगा। इस बार भी सीबीएसई की सीटीईटी परीक्षा में दो पेपर होंगे। पहला पेपर उन परीक्षार्थियों के लिए होगा जो कक्षा एक से लेकर 5वीं तक को पढ़ाना चाहते हैं और दूसरा पेपर कक्षा छह से लेकर 8वीं तक को पढ़ाने के लिए पात्रता हासिल करना चाहते हैं। सीबीएसई ने परीक्षा केंद्रों का भी चयन कर लिया है।


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20 हजार संविदा ड्राइवरों-कंडक्टरों का पारिश्रमिक बढ़ा
लखनऊ (ब्यूरो)। उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम ने 20 हजार संविदा ड्राइवरों एवं कंडक्टरों का बुधवार को पारिश्रमिक बढ़ाने का फैसला किया है। निगम ने इनके पारिश्रमिक में नौ पैसा प्रति किमी के रेट से बढ़ोतरी की है। नया रेट एक फरवरी से प्रदेश भर में लागू होगा।
परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक के.रवींद्र नायक ने ड्राइवरों एवं कंडक्टरों के बढ़े हुए पारिश्रमिक के सिलसिले में बुधवार को सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को आदेश का सरकुलर भेज दिया है। एक फरवरी से इन्हें 1.26 रुपये प्रति किमी के रेट से पारिश्रमिक का भुगतान किया जाएगा। अभी तक यह 1.17 रुपये प्रति किमी के रेट से दिया जाता है। निगम ने इससे पहले अक्टूबर 




2014 में ड्राइवरों एवं कंडक्टरों का पारिश्रमिक बढ़ाया था।

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धूप भी नहीं तोड़ पाई ठंड का गुरूर 28
सहारनपुर : लगातार कोहरे की मार ङोल रहे लोगों को बुधवार को भी कोई राहत नहीं मिली। हालांकि बुधवार को सूर्य भगवान ने दर्शन देकर लोगों को राहत जरूर दी, लेकिन धूप ठंड का गुरूर नहीं तोड पाई। न्यूनतम तापमान एक डिग्री पर ही बना रहा वहीं अधिकतम तापमान 17 डिग्री दर्ज किया गया। बुधवार को कोहरा नहीं होने के कारण सुबह की धूप खिलने लगी थी। बादलों के कारण धूप छांव के साथ दिन की शुरूआत हुई, नौ बजते बजते पूरी तरह से धूप खिल गई थी। दिनभर चलने वाली बर्फीली हवाओं पारे का सुधरने का मौका नहीं दिया। मौसम विशेषज्ञ अभी ठंड से राहत नहीं मिलने की चेतावनी दे रहे है। उनका कहना है कि पाला व कोहरा अभी कुछ दिन तक लोगों को परेशान करने वाला है।सहारनपुर : लगातार कोहरे की मार ङोल रहे लोगों को बुधवार को भी कोई राहत नहीं मिली। हालांकि बुधवार को सूर्य भगवान ने दर्शन देकर लोगों को राहत जरूर दी, लेकिन धूप ठंड का गुरूर नहीं तोड पाई। न्यूनतम तापमान एक डिग्री पर ही बना रहा वहीं अधिकतम तापमान 17 डिग्री दर्ज किया गया। बुधवार को कोहरा नहीं होने के कारण सुबह की धूप खिलने लगी थी। बादलों के कारण धूप छांव के साथ दिन की शुरूआत हुई, नौ बजते बजते पूरी तरह से धूप खिल गई थी। दिनभर चलने वाली बर्फीली हवाओं पारे का सुधरने का मौका नहीं दिया। मौसम विशेषज्ञ अभी ठंड से राहत नहीं मिलने की चेतावनी दे रहे है। उनका कहना है कि पाला व कोहरा अभी कुछ दिन तक लोगों को परेशान करने वाला है।
[5:08am, 1/28/2016] ✒अनुज सैनी🇮🇳NEWS WORLD✒: -11
होम एग्जाम की कापियों पर बोर्ड के प्रैक्टिकल 20
सहारनपुर : यूपी बोर्ड की कापियों पर नहीं, बल्कि होम एग्जाम की कापियों पर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षाएं कराई जा रही हैं। बोर्ड के परीक्षा शुल्क वसूलने के बावजूद कापियां का खर्च कालेज उठाने को मजबूर हैं। हद तो यह है कि ये कापियां बोर्ड कार्यालय को नहीं भेजी जातीं। परीक्षा के प्राप्तांक का विवरण ही संबंधित परीक्षक व कालेज से बोर्ड को भेजा जाता है। इस बार 18 फरवरी से शुरू हो रही बोर्ड परीक्षाओं के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। संकलन केन्द्रों पर बोर्ड परीक्षा सामग्री भेजने की प्रक्रिया गतिमान है। जिले मे इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षाएं द्वितीय चरण में पांच जनवरी से आरंभ हुई थीं। परीक्षाओं के लिए बोर्ड से कापियां कालेजों को उपलब्ध नहीं कराई जाती, बल्कि परीक्षाएं होम एग्जाम की कापियों पर कराई जाती हैं, जिनके खर्च का भार संबंधित कालेज को उठाना पड़ता है। प्रधानाचार्यो का कहना है कि कई वर्षो से यही व्यवस्था चल रही है। कई बार बोर्ड को इस बारे में अवगत कराया गया है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।1परीक्षा को अधिकृत कालेज-परीक्षक1हाईस्कूल की प्रयोगात्मक परीक्षाएं कालेज स्तर पर आंतरिक परीक्षक से कराई जाती है। संबंधित विषय में 70:30 के रेशियो से यह परीक्षा होती है। यानी लिखित परीक्षा 70 अंक तथा प्रयोगात्मक 30 अंक की होती है। कापी चेकिंग के बाद प्राप्तांक बोर्ड को भेजने का जिम्मा कालेज का होता है। इंटरमीडिएट प्रयोगात्मक विषयों में निर्धारित पूर्णाक में से 50 प्रतिशत अंक आंतरिक परीक्षक से तथा 50 प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक से मिलते हैं। व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के लिए जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु केन्द्र निर्धारित किए गए हैं उनमें संबंधित विषयों के अध्यापक 50 प्रतिशत अंक आंतरिक मूल्यांकन में तथा शेष 50 प्रतिशत वाह्य परीक्षक की ओर से दिए जाते हैं।1बोर्ड नहीं जातीं प्रयोगात्मक की कापियां1कालेज व परीक्षक बोर्ड को केवल परीक्षार्थीवार परीक्षा के अंक भेजते हैं, कापियां नहीं। सूत्रों का कहना है कि इंटरमीडिएट की कापियां संबंधित परीक्षक या तो साथ ले जाते हैं अथवा कई बार कालेज में ही छोड़ देते हैं। ऐसे में यदि कोई छात्र बोर्ड से आरटीआइ के अंतर्गत कॉपी की फोटो प्रति मांग ले तो वह उसे उपलब्ध नहीं हो सकेगी।1इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षाएं1भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, भूगोल, कृषि, गृहविज्ञान, सिलाई, खेल एवं शारीरिक शिक्षा।1इनका कहना है..1जिला विद्यालय निरीक्षक आरके तिवारी का कहना है कि प्रयोगात्मक परीक्षाओं के दौरान बोर्ड की कापी उपलब्ध नहीं होती। लिखित परीक्षा के लिए ही बोर्ड कापियां उपलब्ध कराता है। इसी कारण प्रयोगात्मक परीक्षाएं कालेजों की कापियों पर होती हैं। कापियों बोर्ड को न भेजे जाने के सवाल पर उनका कहना था कि यह जिम्मेदारी संबंधित कालेज व परीक्षक की होती है।

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CTETTEACHER ELIGIBILITY TEST (TET)NCTERTEUPTETHTETJTET / Jharkhand TETOTET / Odisha TET  ,
Rajasthan TET /  RTET,  BETET / Bihar TET,   PSTET / Punjab State Teacher Eligibility TestWest Bengal TET / WBTETMPTET / Madhya Pradesh TETASSAM TET / ATET
UTET / Uttrakhand TET , GTET / Gujarat TET , TNTET / Tamilnadu TET APTET / Andhra Pradesh TET , CGTET / Chattisgarh TETHPTET / Himachal Pradesh TET
 

Monday, 25 January 2016

कितने रोहित वेमुला?

कितने रोहित वेमुला?

अगर आपने रोहित वेमुला की आत्महत्या की ख़बर को भी उतनी ही तवज्जो दी जितनी आप किसी मंत्री की भैंस के भागने या किसी राजनेता की नाक पर मक्खी बैठने की ख़बर को देते हैं जो मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी. हो सकता है आपको यह भी न पता हो कि रोहित वेमुला था कौन. 
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See Also ->>
क्या कहती हैं जांच रिपोर्ट >>> https://www.youtube.com/watch?v=NJicdSM2xP4

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हैदराबाद यूनिवर्सिटी में पीएचडी की दूसरे साल साल की पढ़ाई करता था कुल छब्बीस साल का यह नौजवान जिसने घनघोर निराशा और डिप्रेशन के चलते बीते रविवार की शाम को अपनी जान दे दी. पिछले साल अगस्त में फिल्म 'मुज़फ्फ़रनगर बाक़ी है' के प्रदर्शन पर एबीवीपी के आक्रमण की निंदा करते हुए कुछ छात्र संगठनों ने, जिनमें कुछ दलितबहुल संगठन भी शामिल थे, इस घटना का सैद्धांतिक प्रतिकार किया था. 

इसी महीने हैदराबाद यूनिवर्सिटी ने पांच दलित छात्रों को छात्रावास खाली करने का आदेश दिया था. उनसे कहा गया कि वे अपने रहने का इंतजाम कर लें. इस आदेश में उन्हें निकाले जाने के जो कारण गिनाये गए थे उनमें एक यह था कि इन छात्रों ने याकूब मेमन की फांसी का विरोध किया था. इन छात्रों में रोहित भी था.

बहरहाल पिछले पंद्रह दिन से इस एकतरफ़ा कार्रवाई का  विरोध कर रहे इन पांच बच्चों को बीते कई दिनों से तम्बुओं में रातें बिताने को विवश होना पड़ रहा था - उन्हें तमाम तरह से अपमानित और प्रताड़ित किये जाने का सिलसिला तो काफ़ी पहले से शुरू हो चुका था. उन्हें "जातिवादी, अतिवादी और राष्ट्रविरोधी" जैसे विशेषणों से संबोधित किया गया. यह एक सोशल बॉयकॉट था जिससे भीतर तक आहत रोहित वेमुला को ऐसा कदम उठाने पर विवश कर दिया. कबाड़ी दिलीप मंडल ने अपनी फेसबुक वॉल पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहित को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा - "हम शायद पर्याप्त नाराज नहीं हैं. हमें आदत सी पड़ गई है. हम उत्पीड़न के लिए नॉर्मलाइज़ हो चुके हैं. चलता है.... क्यों? रोहित को आदत नहीं पड़ी थी. वह हम लोगों की तरह नॉर्मल नहीं था."

रोहित ने अपनी मौत से पहले जो चिठ्ठी छोड़ी है वह केवल अपने माता-पिता, दोस्तों, पुलिस, वाइस-चांसलर या मीडिया के लिए नहीं है. वह हर उस भारतीय को लिखी गयी है जिसके भीतर थोड़ा बहुत इंसान अब भी बचा हुआ है और जो धरती, चाँद-तारे, विज्ञान और प्रेम जैसी ठोस वास्तविकताओं पर भरोसा करता है. तकरीबन कविता जैसी रूमानी भाषा में लिखी गयी इस चिठ्ठी को आपने बार-बार पढ़ना चाहिए ताकि आने वाले काले दिनों की आहट आपके मन में लगातार गूंजती रहे. इस चिठ्ठी को आपने औरों को भी पढ़वाना चाहिए ताकि आप यकीन कर सकें कि अभी आप उत्पीड़न के लिए नॉर्मलाइज़ नहीं हुए हैं. 

अलविदा रोहित! 
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रोहित वेमुला

रोहित के अंतिम पत्र का यह मोटा-मोटा अनुवाद बीबीसीडॉटकॉम से साभार लिया गया है- 

गुड मॉर्निंग,

आप जब ये पत्र पढ़ रहे होंगे तब मैं नहीं होऊंगा. मुझ पर नाराज़ मत होना. मैं जानता हूं कि आप में से कई लोगों को मेरी परवाह थी,आप लोग मुझसे प्यार करते थे और आपने मेरा बहुत ख़्याल भी रखा. मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है. मुझे हमेशा से ख़ुद से ही समस्या रही है. मैं अपनी आत्मा और अपनी देह के बीच की खाई को बढ़ता हुआ महसूस करता रहा हूं. मैं एक दानव बन गया हूं. मैं हमेशा एक लेखक बनना चाहता था. विज्ञान पर लिखने वालाकार्ल सगान की तरह. लेकिन अंत में मैं सिर्फ़ ये पत्र लिख पा रहा हूं.

मुझे विज्ञान से प्यार थासितारों सेप्रकृति सेलेकिन मैंने लोगों से प्यार किया और ये नहीं जान पाया कि वो कब के प्रकृति को तलाक़ दे चुके हैं. हमारी भावनाएं दोयम दर्जे की हो गई हैं. हमारा प्रेम बनावटी है. हमारी मान्यताएं झूठी हैं. हमारी मौलिकता वैध है बस कृत्रिम कला के ज़रिए. यह बेहद कठिन हो गया है कि हम प्रेम करें और दुखी न हों.

एक आदमी की क़ीमत उसकी तात्कालिक पहचान और नज़दीकी संभावना तक सीमित कर दी गई है. एक वोट तक. आदमी एक आंकड़ा बन कर रह गया है. एक वस्तु मात्र. कभी भी एक आदमी को उसके दिमाग़ से नहीं आंका गया. एक ऐसी चीज़ जो स्टारडस्ट से बनी थी. हर क्षेत्र मेंअध्ययन मेंगलियों मेंराजनीति मेंमरने में और जीने में.

मैं पहली बार इस तरह का पत्र लिख रहा हूं. पहली बार मैं आख़िरी पत्र लिख रहा हूं. मुझे माफ़ करना अगर इसका कोई मतलब न निकले तो.

हो सकता है कि मैं ग़लत हूं अब तक दुनिया को समझने में. प्रेमदर्दजीवन और मृत्यु को समझने में. ऐसी कोई हड़बड़ी भी नहीं थी. लेकिन मैं हमेशा जल्दी में था. बेचैन था एक जीवन शुरू करने के लिए. इस पूरे समय में मेरे जैसे लोगों के लिए जीवन अभिशाप ही रहा. मेरा जन्म एक भयंकर दुर्घटना थी. मैं अपने बचपन के अकेलेपन से कभी उबर नहीं पाया. बचपन में मुझे किसी का प्यार नहीं मिला.

इस क्षण मैं आहत नहीं हूं. मैं दुखी नहीं हूं. मैं बस ख़ाली हूं. मुझे अपनी भी चिंता नहीं है. ये दयनीय है और यही कारण है कि मैं ऐसा कर रहा हूं.

लोग मुझे कायर क़रार देंगे. स्वार्थी भीमूर्ख भी. जब मैं चला जाऊंगा. मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता लोग मुझे क्या कहेंगे. मैं मरने के बाद की कहानियों भूत प्रेत में यक़ीन नहीं करता. अगर किसी चीज़ पर मेरा यक़ीन है तो वो ये कि मैं सितारों तक यात्रा कर पाऊंगा और जान पाऊंगा कि दूसरी दुनिया कैसी है.

आप जो मेरा पत्र पढ़ रहे हैंअगर कुछ कर सकते हैं तो मुझे अपनी सात महीने की फ़ेलोशिप मिलनी बाक़ी है. एक लाख 75 हज़ार रुपए. कृपया ये सुनिश्चित कर दें कि ये पैसा मेरे परिवार को मिल जाए. मुझे रामजी को चालीस हज़ार रुपए देने थे. उन्होंने कभी पैसे वापस नहीं मांगे. लेकिन प्लीज़ फ़ेलोशिप के पैसे से रामजी को पैसे दे दें.

मैं चाहूंगा कि मेरी शवयात्रा शांति से और चुपचाप हो. लोग ऐसा व्यवहार करें कि मैं आया था और चला गया. मेरे लिए आंसू न बहाए जाएं. आप जान जाएं कि मैं मर कर ख़ुश हूं जीने से अधिक.

'छाया से सितारों तक'

उमा अन्नाये काम आपके कमरे में करने के लिए माफ़ी चाहता हूं.

अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन परिवारआप सब को निराश करने के लिए माफ़ी. आप सबने मुझे बहुत प्यार किया. सबको भविष्य के लिए शुभकामना.

आख़िरी बार

जय भीम

मैं औपचारिकताएं लिखना भूल गया. ख़ुद को मारने के मेरे इस कृत्य के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं है.

किसी ने मुझे ऐसा करने के लिए भड़काया नहींन तो अपने कृत्य से और न ही अपने शब्दों से.

ये मेरा फ़ैसला है और मैं इसके लिए ज़िम्मेदार हूं.


मेरे जाने के बाद मेरे दोस्तों और दुश्मनों को परेशान न किया जाए.

Sabhaar : http://kabaadkhaana.blogspot.in/2016/01/blog-post_75.html